खतरे में दिल्ली की क्लस्टर बस सेवा, बढ़ सकती है लाखों यात्रियों की परेशानी, कर्मचारियों ने CM रेखा से की ये मांग – CLUSTER BUS SCHEME IN DELHI
दिल्ली में क्लस्टर बसों का संचालन खतरे में है. सीएम को बस ऑपरेटर्स ने करीब 300 करोड़ के भुगतान के लिए लिखा पत्र

नई दिल्ली: दिल्ली की सड़कों पर दौड़ रहीं बसें मेट्रो के बाद दूसरी सबसे बड़ी लाइफ लाइन मानी जाती हैं. कुल बसों में से 3100 बसें ‘क्लस्टर बस योजना’ के तहत चलाई जा रही हैं. ये बसें प्राइवेट ऑपरेटरों की हैं. इन प्राइवेट ऑपरेटरों का दावा है कि दिल्ली सरकार व परिवहन विभाग पर उनका करीब 300 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है. अगर सरकार की तरफ से जल्द भुगतान नहीं किया गया तो बसों का संचालन करना मुश्किल होगा. ऐसे में बसों का संचालन बंद भी हो सकता है, जिससे दिल्ली के लाखों यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ सकती है. प्राइवेट ऑपरेटर्स सरकार की तरफ उम्मीद से देख रहे हैं कि बहुत जल्द उन्हें पैसा दिया जाएगा, जिससे कि वह क्लस्टर बसों का संचालन सुचारू रखें.
दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (डीटीसी) के अधीन करीब 3800 बसें चलाई जा रही हैं, जिनमें सीएनजी व इलेक्ट्रिक बसें हैं. वहीं दिल्ली इंटीग्रेटेड मल्टी मॉडल ट्रांजिट सिस्टम (डिम्ट्स) के अधीन 3750 बसें चल रही हैं. इसमें से 650 बसें इलेक्ट्रिक हैं, जबकि 3100 बसें निजी ऑपरेटरों की हैं. ऑरेंज रंग की इन सीएनजी बसों को क्लस्टर बसें भी कहा जाता है, जिन्हें क्लस्टर बस योजना के तहत चलाया जाता है. यानी कि बसें निजी ऑपरेटरों की हैं और डिम्ट्स की निगरानी में चलाई जाती हैं. दिल्ली में चल रहीं 3100 क्लस्टर बसें 14 प्राइवेट ऑपरेटरों की हैं. दिल्ली में क्लस्टर बस योजना को 2007-08 में शुरू किया गया था. इसका उद्देश्य निजी ब्लू लाइन बसों की जगह एक संगठित व सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन प्रणाली स्थापित करना था.
लाखों लोग रोजाना बसों में करते हैं सफर: दिल्ली में चल रही बसों में रोजाना करीब 41 लाख यात्री सफर कर गंतव्य तक पहुंचते हैं, लेकिन पिछले कई महीनों से उन्हें दिल्ली सरकार से भुगतान नहीं मिला है. ऐसे में ऑपरेटरों को कर्मचारियों को वेतन देने, बसों की मरम्मत, ईंधन भरवाने व अन्य संचालन संबंधित खर्चों में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.
1500 क्लस्टर बसें हटीं: दिल्ली टैक्सी, टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एंड टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सम्राट का कहना है कि क्लस्टर बस योजना के बस ऑपरेटर्स के करीब 300 करोड़ रुपये बकाया हैं. कई बार सरकार और संबंधित विभाग से संपर्क किया है. हर बार सिर्फ आश्वासन मिलता है. दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद भी कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई. वहीं करीब 1500 बसें क्लस्टर योजना से हट गई हैं.

सीएम को पत्र लिखकर की मांग: उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र लिखकर समस्या से अवगत कराया गया है. साथ ही जल्द भुगतान की मांग की गई है. अगर जल्द भुगतान नहीं हुआ तो बस सेवा रोकना हमारी मजबूरी बन जाएगी, क्योंकि हम आखिर कब तक अपने जेब से पैसा लगाकर बसों का संचालन करते रहेंगे. वहीं, इस संबंध में ईटीवी भारत ने डिम्ट्स के अधिकारियों से बात की तो उन्होंने कहा कि ऑपरेटर्स को पैसे देने का काम सरकार का है. हम सिर्फ बसों के संचालन की निगरानी करते हैं.
व्यापारी भी भुगतान न होने से परेशान: दिल्ली के कश्मीरी गेट स्थित व्यापारी यश ने बताया कि उनकी बसों के पार्ट्स की दुकान हैं. दिल्ली के विभिन्न क्लस्टर डिपो में उनके यहां से बसों के पार्ट्स जाते हैं. उनका लाखों रुपया बकाया है. डिपो के अधिकारी कहते हैं कि दिल्ली सरकार से पैसा नहीं मिला है, जिसकी वजह से भुगतान नहीं कर पा रहे हैं. दिल्ली सरकार से जैसे ही पैसा मिलेगा. दुकानदारों को भी भुगतानकर कर दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि पैसा रुकने के कारण उनका काम प्रभावित हो रहा है. उनकी तरह अन्य दुकानदार भी हैं, जिनके यहां से प्राइवेट बस ऑपरेटर सामान ले जाते हैं, लेकिन सरकार से पैसा न मिलने के कारण बस ऑपरेटर दुकानदारों को भी पैसा नहीं दे पा रहे हैं.
जल्द हल निकाले सरकार: दिल्ली परिवहन विभाग के पूर्व उपायुक्त व परिवहन विशेषज्ञ अनिल छिकारा का कहना है कि यदि बसों का संचालन रुकता है तो इसका सीधा असर यात्रियों पर पड़ेगा. बसों की कमी से परिवहन व्यवस्था बिगड़ जाएगी. सरकार को प्राइवेट ऑपरेटर्स से बात कर समस्या का समाधान निकालना चाहिए. दिल्ली सरकार और ऑपरेटरों के बीच कई मुद्दों को लेकर आपसी विवाद भी है. भुगतान न होने का यह भी एक कारण है. दिल्ली में डीटीसी के ही अधीन क्लस्टर योजना की बसों को चलाना चाहिए था. दिल्ली में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए डिम्ट्स जैसी एक अलग बॉडी बनाकर सरकार ने गलती की थी.
